#Vicious
My Touching Poem..!!!
यारों कच्ची मिट्टी से ही बना होता हैं
जो कमजोर-सी उम्मीदों का 🏘 घर
ढह जाता हैं वह चंद शक-ओ-सूबे में
पैवस्त पहली ही बारिशों में बह कर
हाँ मग़र ज़िन्दा उम्मीदों की बुनियादें
जिसकी संगीन-यक़ीन से हो लबालब
तो चाहे फिर कैसे भी आँधी-तूफ़ान हो
या बद-बदतर हालतों में भी रहे दट़ कर
बने ही हो जो जहाज़ बस समंदर 🌊ही
में आँधी-ओ-तूफ़ानोंसे टकरानेके लिए
रहतीं जीदगीं-भर,उन्हें ख़ौफ़ज़दा-सी
चट्टानें तक भी ना हिला सके लड़ कर
तूफ़ान 🌪 गर मँझधार में भी हो तो
ग़म नही, उम्मीदें लें आती हैं बचा कर
हाँ मगर दरारें ग़र उम्मीदकी बुनियादोंमें
ही हो तो डूबतीं है नैया किनारे आ कर
जवा-मर्द-सा इन्सान जिस्मसे तो हो पर
दिल से ग़र कमजोर तो बिखरे तूट कर
मौजूदा महामारी 😷के इस नाज़ुक-से
दौरमें सँभलता वही जो उठता गिर कर
प्रभुजी भी नहीं बचाते उसे जो ख़ुद ही
ख़ुद की🧿नज़रमें न सँभला हो गिर कर
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