दर्द का पता ही अगर तुम पूछना चाहते हो ,
ये पूछो उन सिसकती आँखों से,
जो कल रात ब्याहे नहीं ख्वाबों से.
प्यार की मंज़िल तुम पूछो तो मेरे तकिये से पूछो ,
जो भीगा था मेरे साथ रातभर ,
मेरी बारिश की बौछार कुछ उस पर गिरी थी,
जब की मुझे न होश था पलभर.
टूटना कहते है किसको पूछना नब्ज़ से मेरी ,
तुम्हारी याद में जिसने खूँ सूखा दिया ,
आँखों के निचे दिए कुछ अँधेरे,
चेहरे पे भर भर दी उदासी ,
सपनो को जिसने नौच लिया और खा गयी वह तन्हाई ,
उस डोर से पूछना जो तुमने खींच ली ,
जिससे चलती थी मेरी रवानी ,
तुम्हारे प्यार में जिसने जी जला दिया,
चलो! खैर, छोड़ दो ,
क्या फायदा ,
भूल गए ?
हां भूला दिया.
---ख़ुशी