वो पूछे कि मैं कौन तेरी ?
कहती है मैं कौन तेरी ?
मुझको बतलाओ आज अभी
क्यों मुझपर इतने पागल हो
मुझको बतलाओ राज सभी
अब कैसे उसको बतलाऊ मैं
जो राज दिलो में गहरे है
तू सबकुछ है इस दुनिया में
जिसपर दुनिया के पहरे है।
तू इश्क़ सुनहरी बातो का ,
सूरज का पहला पहर लिए,
तू चाँद रोशिनी रातो का ,
मीठी सी चाशनी पिए हुए ,
तू मौसम है , इतवारो का
जिसमे ठंडक इतराती है ,
तू चादर है, हवा मोहल्ले की ,
कैसे बस छूकर जाती है,
तू तेज़ हवा का बादल है ,
जिसको बस उड़ना आता है ,
तू मीठी रातो का सपना है,
जाने कैसे खो जाता है ,
तू चुस्की गरम चाय की है,
क्यों सब तुझमे घुल जाते है ?
तुझमे है महक गुलाबो की,
क्यों कदम मेरे रुक जाते है,
तू घास पे ओस की बूंदो सी ,
मोती के जैसे बनी हुई ,
तू संगीत सुनाती कोयल की,
मीठी बोली में घुली हुई ,
तू सबकुछ है इस दुनिया में
जो कुछ भी मन को भाता है
तू हर एक कविता शिवू मेरी
ये दिल बस तुझको गाता है