हम मनुष्य बहोत कठीन एवम् निर्मल होते हे,हम चाहे तो कुछ रिश्ते ऐसे बना सकते हें जो केवल उनके हित में कार्यरत हो जिनका जीवन मे कोई नही हे,फीर चाहे वो व्रूध हो या जवान या फिर कोइ बच्चा,
जिन रिश्तों मे ज़हर घुल चुका हो,
वो रिश्ते अमृत मिला देने से भी,
मीठे नहीं हो सकते।
लेकीन हम क्यां करते हे,हम यह करते हे☝️