समझदार हैं हम इस जहां में,
मगर, मासुम बनता है मन जहां...
वो घर है।
आंखें हर दर्द सहकर हसती हैं जहां में,
मगर, सबको डराने के लिए रोती हैं जहां...
वो घर है।
हर चीज़ छोड़ देते दुसरो के लिए जहां में
मगर, छोटा टुकड़ा भी हक से मांगते हैं जहां...
वो घर है।
युं तो बड़े शांत हैं हम इस जहां में,
मगर, हर बात अपनी मनवाते है जहां...
वो घर है।
अब ज्यादातर वक्त बिताते हैं जहां में,
मगर, जिंदगी का वक्त जिंदगी लगता है जहां...
वो घर है।
- भाविका गोर
🎊stay home, stay safe 🎊