माना...परिस्थितियाँ हमेंशा हमारे हक में नहीं होती, शायद कभी-कभी हम परिस्थिति वश मजबूर भी हो जाते हैं.गुस्सा, द्वेष, प्यार, खुशी, नफरत जैसे भाव आना भी स्वाभाविक है और शायद.... उन्हें जताना भी जरूरी हो सकता है परंतु, अपशब्द हमारी जरूरत कभी नहीं हो सकते...