मांग का सिंदूर
नारी की मांग का सिंदूर
अधिकार और कर्तव्य में
सामंजस्य का प्रतीक
आपस में सद्भाव, समर्पण व
प्रेमपूर्वक जीवन निर्वाह का निर्देश
वचनबद्धता रहे सप्त वचनों पर
तो जीवन में नही होगा क्लेश
कर्तव्य एवं आदर्श का देता है संदेश
आधुनिक सभ्यता व संस्कृति में
विवाह का बदल गया है स्वरूप
आज शादी, कल झगडा,
परसों हो गया तलाक
सभ्यता, संस्कृति के साथ
यह कैसा मजाक
विवाह की गंभीरता को समझो
यह नही है मनोरंजन
इस निर्भर है तुम्हारा संपूर्ण जीवन
गंभीरता पूर्वक करो
वैवाहिक जीवन का निर्वाह
तभी सुखी और शांतिमय होगी
जीवन की राह।