लब्जों में ना सही, नजरों नज़र बात हो।
हकीकत में न सही, ख्वाबों में मुलाक़ात हो।
नजदीक हम न सही, बीच में जज़बात हो।
दिन में शुकन न सही, मिलन की रात हो।
रास्ते सरल न सही, सफर में तेरा साथ हो।
दुनिया दोस्त न सही, हाथों में तेरा हाथ हो।
रातों में नींद न सही, पूरी रात तुझ से जुड़े खयालात हो।
उत्तर मिले न सही, तुझ से जुड़े सारे सवालात हो।
जिंदगी में सुख न सही, संग तेरे लगती सौगात हो।
झील मिलाती रात न सही, तेरे दीदार से प्रभात हो।
मुकम्मल हो न सही, तुझ से ही शुभ शुरुआत हो।
मंजिल मिले न सही, कथा हमारी प्रख्यात हो।
@दीपेश कामडी 'अनीस'
19/06/2020