#अद्वितीय
मेरा देश अद्वितीय यारों, इसके जैसा कोई नहीं ।
सब मिलजुल कर रहते यारों, ऐसा देश कहीं नहीं ।
बांटें एक दूजे के गम,खुशियाँ फैलाते हैं हम।
दुश्मन कितना जाल बिछा ले,मिल कर तोड़ेंगे भी हम ।
गंगा, जमुना है पहचान, इसकी कभी घटे न शान ।
मुँह तोड़ेंगे दुश्मन का,आओ मिलकर लें हम ठान ।
मुश्किल समय है मत घबराना, भड़कावे में कभी न आना ।
गद्दारों को तुम पहचानो, इनकी बातों में न आना ।
आओ इसको करें नमन,ऊँचा इसका शीश उठायें ।
जब तक सांसों में है सांस, इसके गुण गाते ही जाएँ ।
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