ना समझो के तुम पर बोझ है बेटियां।
नये ज़माने की नई सोच है बेटियां।
कभी नहीं होती कोई भी कमज़ोर बेटियां।
फिर भी रेहती है मान मर्यादा में बेटियां।
एक घर को छोड़ कर दूसरे घर को जाती है बेटियां।
बेटी और बहु बनकर दो घर सजाती है बेटियां।
दिल से दूर ना होकर भी दुर रहती है बेटियां।
धड़कन बनकर दिल में धड़कती है बेटियां।
एक ज़िन्दगी को जन्म देनेवाली ज़िंदगी की जड़ होती है बेटियां।
खुश रहते हैं वो जो समजते हैं ईश्वर का आशीर्वाद होती हैं बेटियां।