मेरे आख्यात्मक उपन्यास ताना बाना की दो कड़ियाँ मातृभारती पर उपलब्ध हैं और अगले चार अध्याय प्रकाशन के लिए तैयार हैं ।
भारत में पिछले सौ साल में औरतों की जिंदगी किन रोमांचक खाइयों से होती हुई यहाँ तक पहुंची ।यह अपने आप मे रोमांचक मुलाकात हैगी। अवश्य पढें और अपने विचारों से अवगत कराएं