हिम्मत जुटा के हमने, एक काम कर दिया,
इजहार-ए-इश्क हमने खुलेआम कर दिया,,
यारों को दरकिनार किया, दिल की सुनी बात,
दुनिया से भी लड़ जायेंगे ऐलान कर दिया,,
कट जायेगी ताउम्र,महबूब की चौखट पे,
उनकी गली का फेरा सुबह शाम कर दिया,,
थामा है उनका हाथ ,चिलमन की आड़ से,
उनकी भी आरजू का एहतराम कर दिया,,