Hindi Quote in Story by Rajesh Maheshwari

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चीकू


राममनोहर नाम के एक प्रसिद्ध व्यवसायी अपने व्यापार से ज्यादा पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम के कारण विख्यात थे। उनका एक कुत्ता चीकू जिसे उन्होनें बचपन से पाला था उनके प्रति समर्पित एवं वफादार था, वह उन्हें बहुत अधिक प्यार करता था और राममनोहर जी भी उसे बहुत चाहते थे।
उनके परिवार के सदस्यों का चीकू के प्रति कोई प्रेम भाव नही था। वे प्रतिदिन उसकी कोई न कोई शिकायत करते रहते थे। राममनोहर उनकी इन बातों को नजर अंदाज कर देते थे। लगातार शिकायतों के कारण उनके मन में भी खीझ उत्पन्न हो रही थी।
एक दिन वे इसी खीझ के कारण क्रोधित होकर चीकू को काफी दूर छोड़ आये। वापिस आने के बाद उन्हें अपने कृत्य पर बहुत पछतावा हुआ। उन्हें लगने लगा कि क्षणिक आवेश में आकर उन्होनें बहुत ही अमानवीय कार्य कर दिया है। वे चीकू को लाने के लिये वापस गये, परंतु बहुत खोजने के बाद भी वह उन्हें नही मिला। वे भारी मन से आँखों में आँसू लिये वापस लौट आये। उनका मन बहुत व्यथित था, वे बिना किसी से बात किये चुपचाप अपने कमरे में चले गये। परिवार के अन्य सदस्य चीकू के चले जाने से बहुत खुश थे।
दूसरे दिन सुबह राममनोहर जी बगीचे में दुखी मन से चाय पी रहे थे तभी उन्होने चीकू को बंगले के अंदर प्रवेश करते देखा। उसे देखकर वे अत्यंत भावुक हो गये और उसे गोद में उठा लिया। चीकू को देखकर उन्हें महसूस हुआ, जैसे वह पूछ रहा हो कि आखिर मेरी क्या गलती थी, जिसकी आपने मुझे इतनी कठोर सजा दी। वे उससे आँखे नही मिला पा रहे थे। परिवार के अन्य सदस्य उसके लौट आने से भौचक्के थे।
रात के समय सब लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तभी चोरो के एक गिरोह ने बंगले में प्रवेश किया और चीकू भौंककर दौडता हुआ उनके पास पहुँचा। चीकू की आवाज सुनकर चैकीदार भी उस तरफ दौड पड़े, चीकू ने भागते हुये एक चोर का पैर पकड़ लिया उसने अपने को छुडाने के लिये चाकू से वार किया। चाकू के वार के कारण चीकू घायल हो गया था परंतु उसने चोर का पैर नही छोड़ा तब तक चौकीदारों ने आकर उस चोर को पकड़ लिया। इस चीख पुकार से परिवार के सभी सदस्य बाहर की ओर दौडे और पूरा माजरा जानने के बाद चोर को पुलिस के हवाले कर दिया गया।
अब सबका ध्यान गंभीर रूप से घायल चीकू की ओर गया और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। चीकू की इस बहादुरी एवं वफादारी की तारीफ सारा मुहल्ला कर रहा था। राममनोहर जी दुखी मन से चीकू को दफनाते हुये सोच रहे थे कि वो मेरा अहसानमंद था या मैं उसका अहसानमंद हूँ ?

Hindi Story by Rajesh Maheshwari : 111476493
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