#है_प्रिये
क्या हुआ जो आज हम रिक्त हो गए,
क्या हुआ जो हमारे सारे सपने विलुप्त हो गए,
सृष्टि का महामिलन ही सर्वस्व नही होता,
निर्मल पवित्र हृदय का कभी विखंडन नही होता ,
रख विश्वास तू उस विश्वरूप पर,
जो खुशबू खो दे वो कभी चंदन नही होता,
ये जीवनसंघर्ष की भट्टी है तपना तो पड़ेगा,
आखिर तपे बिना कोई कुंदन नही बनता ।।
अतुल कुमार शर्मा "कुमार"