लोग समझ ना सके उनको हम क्या समझाएं, दर्द अपना हर पल हम किस को दिखाएं, इसलिए हंसते रहते हैं, सभी के सामने, कि लोग हमारे दिल को न जाने पाएं, बातें करते रहते हैं हर समय अपनी और आपकी, इसलिए तो बातूनी कहलाते हैं हम,,, किस-किस को हम अपना दिल चीर कर दिखाएं,मुस्कुराने की आदत सी पड़ गई है गमों में भी हमें, हमें बातूनी समझते हैं लोग...नहीं सच बात की पता उनको,, मेरे खयालात और जज्बात क्यों नहीं लोग समझ पाएं, हर कोई बातों बातों में मुझे बातूनी बताएं ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
#बातूनी