फ़िल्म इंडस्ट्री इकलौती नहीं है जो आपको आपके आउटसाइडर होने का एहसास कराती है, कॉलेज कैंपस से लेकर कॉर्पोरेट दफ्तरों में आपको एक विशेष सर्किल का हिस्सा बनने का अवसर तभी मिलता है जब एक प्रबुद्ध वर्ग आपको अपने बराबर समझता हो। बोली और पहनावे पर व्यक्ति को जज करने का चलन आम बात है।