जीवन का सत्य
एक नेताजी की भाषण देते समय अचानक मृत्यु हो गयी, उन्हें यमराज के सन्मुख लाया गया। उन्होने यमराज से कहा कि हे यमराज आपने असमय ही मुझे यहाँ पर बुला लिया है। मुझे अभी जनसेवा के बहुत कार्य पूरे करने थे। अब जनता मेरे ना रहने के कारण विकास से वंचित रह जायेगी। यमराज ने उनकी बात सुनकर कहा कि नेताजी प्रकृति का नियम है कि समय के साथ व्यक्ति भुला दिया जाता है और जो जीवन में अच्छे कर्म करता है उसे याद रखा जाता है।
मैं आपको, आपके घर एवं आसपास होने वाली गतिविधियों को यही से दिखा देता हूँ। आप नीचे पृथ्वी की ओर झाँककर देखिये। नेताजी ने नीचे की ओर झाँककर देखा कि उनके दाह संस्कार के पहले ही घरवाले तिजोरी की चाबियाँ खोज रहें हैं जिसमें विदेश में जमा करोड़ो रूपयों के कागजात हैं। वे जनता को दिखाने के लिये रो रहे हैं परंतु अपना समय वसीयत और बँटवारे के संबंध में जानकारी प्राप्त करने हेतु व्यतीत कर रहें हैं। उनके अनुयायी दूसरे नेताओं के चमचें बन गये हैं एवं उनकी जगह कोई दूसरा नेता नियुक्त कर दिया गया है और वह मन ही मन उनकी मृत्यु से प्रसन्न हो रहा है। जो धन व्यापारियों के पास लगा हुआ था वे उसको हड़प चुके हैं। जनता भी उन्हें भ्रष्टाचारी और हरामखोर कहकर कोस रही है।
यह सब देखकर नेताजी व्यथित होकर कहते हैं कि हे यमराज मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि मैनें जीवन का सत्य देख लिया है मैं अपनी सारी सजायें भुगतने के लिये तैयार हूँ आप कृपा कर मुझे वापस भूलोक मत भेजियेगा। मैं भूलोक के पाखंड से अत्याधिक द्रवित हूँ, वहाँ मक्कारी एवं लापरवाही के साथ और भी बहुत कुछ है किंतु आपके चरण सान्निध्य में केवल आप ही आप है, अतः प्रभु मेरी प्रार्थना स्वीकारीये।