मालूम है,बिखरना है
स्थूल से सूक्ष्म की ओर,
मुझे भी एक दिन।
मगर गुम नहीं होना है।
हां समय और परिस्थितियों पर
मुझे स्वरूप बदलना है।
होंगी कई बार वृष्टि और सृष्टियां
मुझे हर बार इनके बीच
सेतु बनना है।
और हर बार नव ऊर्जा से,
पृथ्वी पर जीवन का वाहक बनना है।😊😊
@rajeshkumar