आज फ़ीज़ा थोडी सर्द सी हो गई, बारिश की वो बुंदे, आज उस आस्माँ को छोड इस ज़मी की होकर रेह गई, मौसम मे भी आज ना जाने केसी बेमानी सी छा गई, कम्बख्त उस चांद को भी आज अपने साथ बादलो मे कहीँ छुपा ले गई, शायद फ़ीज़ा ने कही इस दिल की मन्नतो को पढ लिया होगा, तभी वो रिमझिम सी बारिश आज फिर उनकी सुहानी याद दिला गई।