खुद ही में ईश्वर को हररोज़ जिया करो,
उसका भेद जानने की कोशिश न किया करो।
वह सब देखता है कहता नहीं,
उसे हररोज़ कटघरे में खड़ा मत करो।
वो जो जाते हैं खुदा के घर वो उसके ही बँधे हैं
उन्हें खुद से अलग जानकर निंदा मत करो।
तुम्हें दिखता है वो अगर उसी के बनाए कायनात में
उन्हें वो मंदिरों में दिखता है तो दरवाज़े बंध मत करो।
क्या हुआ की तेरे तर्क में उसका वजूद दिखता नहीं
वह है , हाँ है, तेरे हर ख्याल में, बहुत सोचा मत करो।
- महेंद्र शर्मा 9 जून 2020