सारी दुनिया में भरतभूमि, बलिदानों की परिचायक है।
जिसकी मिट्टी का कण-कण भी,वन्दन करने के लायक है।।
ऋषियों-मुनियों की तपोभूमि,यह आर्यजनों का धाम है।
हर नारी में सीता बसती, पुरुषों में बसे श्रीराम हैं।।
सूरज ग्रास बना करते हैं, नन्हे से शिशुओं के आगे।
सिंह-दंत हमने गिन डाले, भयभीत नहीं होकर भागे।।
समय पड़ा तो हमने वन में,तृण की रोटी भी खायी हैं।
कितनी विपदायें आयीं हो, पर विजय सदा ही पायी हैं।।
हमने अपनी तेगों से ही, अपनी तकदीर बदल डाली।
सदैव शत्रु के गर्जन सुनकर, नयनों में छायी है लाली।।
हम नेत्रहीन हो गये मगर, भूले थे शर संधान नहीं।
गोरी को वेध दिया शर से,तब तक छोड़ें निज प्राण नहीं।।
है कौन शक्ति जग में ऐसी, जो विजित करें हमको आकर।
चाहें जो विश्व विजेता हो, हमसे लौटा मुंह की खाकर।।
#लायक़