जिद है मेरी
खूद ही खूद से मेरी;
वजूद वजूद रटने वाले
वजूद मिटा दूँगा तेरी।
हालते ए हौसले चूर भी हो अगर मेरी,
तो भी तेरी वसीयत में नाम ना होगी मेरी।
अब मैं तबियत का फिक्र नहीं करता,
ना अब वसीयत का जिक्र करता ।
तेरे कदम लङखङाते है जरा सँभल
तेरे सामने से ही हम आते है।