"मांसाहार अब बंद होना चाहिए"
इंसान हो तुम अगर फिर
हैवान क्यों बनते हो?
इन मासूम बेजुबानो को मारकर
महान क्यों बनते हो?
निर्दयी हो तुम इसीलिए
उन मासूमों को खाते हो
अगर है दरियादिली तो
कुछ बड़ा करके क्यों नहीं दिखाते हो
हिम्मत है अगर तो
शेर को मार कर क्यों नहीं खाते हो?
दिया है भगवान ने बहुत कुछ खाने को
फिर क्यों जानवरों को खाते हो
कहता है जानवर
अपनी भाषा में अपनी परेशानी
चीख-चीख कर बताता है वो
अपनी भाषा में अपनी कहानी
हम तो जानवर हैं
हमारी प्रकृति है जानवरों को खाना
क्योंकि हम नहीं बना सकते
अपने हाथ से खाना
लेकिन तुम तो इंसान हो
फिर क्यों जानवरों की फितरत अपना रहे हो
भगवान ने तो तुमको खाना बनाने को हाथ दिए हैं
फिर क्यों हमें खा रहे हो
अपनी भूख मिटाने के लिए
तुम कैसे इतना स्वार्थी हो जाते हो
अगर गलत नहीं है जानवर को खाना
तो फिर क्यों इंसान को जलाते और दफनाते हो
खा लो उसे भी
उसे क्यों श्मशान ले जाते हो
वह बेजुबान जानवर है
इसीलिए उस पर हुकुम चलाते हो
जो मर गया है उसे तो श्मशान ले जाते हो
और जो जिंदा है उसे मारकर खाते हो
कैसा लगेगा तुमको अगर कोई तुम्हारे सामने
तुम्हारे किसी अपने को खा जाए तो
तुम देखते ही रहो असहाय से और
कोई उसे मार कर ले जाए तो
तकलीफ उन्हें भी होती है
दर्द उन्हें भी होता है
फिर क्यों नहीं समझ पाता है इंसान कि
जानवर भी अपनों से बिछड़ कर रोता है
उसे भी अपनों से बिछड़ने का दुख
बिल्कुल हमारी तरह ही होता है
दो आंख एक नाक एक मुंह
उसके पास भी हमारी तरह ही होता है
जैसे हम जीते हैं वह भी
हमारी तरह ही जीता है
बस फर्क सिर्फ इतना रह जाता है कि
वह हमारी तरह सोच और बोल नहीं पाता है
होता है उसे भी दर्द
पर वह बयां नहीं कर पाता है
अगर इंसान को मारना जुर्म है
तो जानवरों को मारना भी जुर्म होना चाहिए
अगर है सजा इंसान को मारने की
तो जानवरों को मारने की भी सजा होना चाहिए
हमारी सभ्यता में नहीं है
ये अंडा मांस मछली या किसी को मारकर खाना
अरे जरा जुड़ कर तो देखो प्रकृति से
उसके पास खूब है प्रोटीन विटामिन
और कैल्शियम का खजाना
कोई धर्म जात या मजहब नहीं सिखाता
किसी भी मासूम जानवर को मारकर खाना
जिस भगवान ने दिया है सबको जीवन
वह कभी किसी को किसी का जीवन छीनना नहीं सिखाता
इस धरती का निर्माण करने वाला अगर एक है
तो हक औरअधिकार भी सबके एक से ही होने चाहिए
जीने का अधिकार अगर हमें हैं तो उन्हें भी होना चाहिए
यह मेरी विनती है सबसे कि मांसाहार अब बंद होना चाहिए।
Written by- Sakshi Jain