💐💐💐पक्षी का सन्देशा💐💐💐
नील गगन में सुबह सवेरे
जब पक्षी उड़ते हैं
उठ जाओ,अब मत सोओ
अपने कलरव से ,यही सन्देशा देते हैं
समय बड़ा अनमोल है प्यारे
इसे व्यर्थ में नहीं गंवाओ
करो परिश्रम, पाओ मंजिल
बस इतना ही कहते हैं
जीवन है एक कर्मधारा
इसमें गोता खूब लगाओ
इस नदी के तल से
पुण्य -कर्म का मोती पाओ
कर्मधारा में बहते - बहते
इस बात को तुम भुल न जाओ
उड़ान भले ऊंची उड़ लो
पर लौट समय से घर आ जाओ
अपने नीड़ के प्यारे साथी
मात- पिता और जीवनसाथी
भूलके भी इनको न बिसरायो
ऊंची उड़ान में देखके तुमको
बड़ा आनन्दित होते हैं
भूल न जाओ तुम इनको
मन ही मन ये डरते हैं
नील गगन में उड़ते -उड़ते
इधर- उधर तुम भटक न जाओ
हरदम तुमको तकते हैं
एक परिंदा उडते - उड़ते
ये सन्देशा देता है , गौधूलि बेला में
जब सब पक्षी ,लौटकर घर आते हैं
चहक - चहक कर अपने
नीड़ को वो गुंजाते हैं
छोड़कर सारी दुनिया दारी
अलमस्त नीड़ में खो जाते हैं
तुम भी ऐसे ही बन जाओ
छोड़कर सारी अफरातफरी
बस परिवार में आनंद मनाओ
जीवन की सारी खुशियाँ पा जाओ