तलाक
तलाक तलाक तलाक !
ये तीन शब्द, जहर से भी प्राण घाती,
आत्मा को गहराई तक छलनी कर जाती ||
ये सिर्फ एक शब्द नहीं, रूह पर एक बोझ है,
जिस मैं दब कर मेरी वजूद, आत्मसम्मान रह जाएगी |
कलंक का वोह अनमिट टिका है,
जिसे पहने मेरी अलग पहचान बन जाएगी ||
कागज़ के कुछ पन्ने लिखेगी तकदीर हमारे रिश्ते की
इस के बाद तो जैसे बदल सी जाएगी हमारी ज़िन्दगी |||
तुम पे सायद ऊँगली कम उठे,
मैं खुद को कैसे लोगों के सवालों से बचाऊंगी ??
कभी सोचा है तुम सायद ना टूटो, मैं कैसे बिखर जाउंगी
तुम्हारा कया खोयेगा तुम ही जानो,
मेरी तो पूरी दुनिया उजड़ जाएगी |||
किस्मत ने यह कैसा इन्तेक़ाम लिया
ना भर ने वाला गहरा घाब दिया
कुबूल है से लेकर तलाक तक
कया इतना ही है एक औरत की दुनिया ??