ज़िन्दगी, ज़माना और लोग
मिरि जिंदगी की हसरतों को झुठलाया गया
मेरे अपनों के हाथों आज चिता पर जलाया गया.. !!
झुलसते रहें ख्वाब ता उम्र अंगारो की तरह
बड़ी शिद्दत से आज मुझें अंगारों पर लिटाया गया.. !!
राख हुए जिस्म की आस्था को लेकर मिरे
मिरे सपनों के साथ दरिया में मुझें जो बहाया गया.. !!
मिरि तस्वीर को रख कर घर पर ए ज़माने
अश्क़ आंखो में रख नेक मुझें सभी से बताया गया.. !!
क्या कहें अपनों और ज़माने की फितरत
जीते जी हर रिश्तों की वफ़ा से जो रहा पराया गया.. !!