उसे केवल तुमसे प्रेम है-
किसी इंसान के सीने में सिर को झुकाकर, और चेहरे को छुपाकर कभी तुमने अपने दुःख को नियंत्रित करने की कोशिश की होगी। कभी उसके काँधे पर सिर रखे घण्टों आँसू बहाए होंगे। कभी उस इंसान ने तुम्हारे दिल के टूटे टुकड़ों को उठाते हुए खुद को भी ज़ख्मी किया होगा।
तुम्हें ये भी नहीं पता की आज भी उन कपड़ों में तुम्हारे आंसूओं को उसने कैद कर रखा है। वो आंसू उसके लिए तुम्हारी ही तरह बहुत कीमती हैं। तुम्हें नहीं पता की तुम्हारे जाने के बाद कुछ देर तक उसने अपने सीने में तुम्हारी मौजूदगी को स्पर्श किया है। हर थोड़ी देर में सीने में हाथ रख तुम्हारे दर्द को, अपनी बढ़ी धड़कनों के पीछे महसूस किया है।
मगर, रोते हुए इंसान अक्सर ये भूल जाते हैं कि जिस सीने में खुद को छुपाकर वो रो रहे हैं। वो सीना उम्रभर के लिए उन आंसुओं से गीला रहता है, वो तुम्हारा दर्द तुम्हारी ही तरह महसूस करने लगता है, और उस तकलीफ का बोझ जीवन भर उठा कर चलता है। मगर इस सब के बाद भी वह शख़्स बहुत कोशिश करता है मगर तुम्हें रोता हुआ नहीं देख सकता। केवल कुछ ना कर पाने के भय से वह तुम्हें खुद में कैद कर रहा है, छुपा रहा है, दुःख से बचा रहा है। उसके बढ़े हुए हाथों ने तुम्हारे आंसुओं को पोंछने की कोशिश की, मगर वो स्वयं दुःख का हिस्सा बनने का साहस नहीं जुटा सका, और आंसुओं का क्या.. ये तो उसके भी बहते हैं मगर दिखते नहीं। वो तुम्हारे सामने मजबूत बन जाता है, लेकिन पिघलता नहीं। उसके भी आंसू उसके काँधे पर गिरते हैं, मगर सूख जाते हैं क्योंकि वो उनको सहेजता नहीं।
क्योंकि वो मनुष्य स्वयं से नहीं तुम से प्रेम करता है।
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