वात्सल्य का झरना !
प्रेम का सागर !
त्याग की नदी !
संघर्ष की गाथा !
जीवन की पाठशाला !
संस्कारो का गुरुकुल !
संघर्षो में पथप्रदर्शक !
भगवान की प्रतिमूर्ति !
अन्नपूर्णा की झांकी !
घर की लक्ष्मी !
संकट में दुर्गा !
धीरता में धरती !
सम्पूर्णता में आकाश !
निर्माण में ब्रह्मा ,
पालन में विष्णु !
कलुषित विचारों की संहारक शिव !
जगत जननी ,
विराट स्वरूपा !
असंख्य गुणों की खान ,
असंख्य किरदारों की नायक !
क्या नही मैंने माँ में देखा ???
हर बात मैंने माँ में देखी ,
ये संसार माँ में देखा !
सिर्फ माँ में देखा .........
सुना है
भगवान का
विराट स्वरूप सिर्फ
अर्जुन ने देखा ,
लेकिन मैंने तो उसे पग - पग पर देखा !!!
माँ में ही वो रूप देखा !!!
माँ में ही मैंने विराट स्वरूप देखा ........
(सुरेंद्र हिन्दू )