कलंक हैं वे सभ्य समाज पर,
जो सुख ढूढ़ते हैं पर पीड़ा में,
प्रताड़ित करते हैं पत्नी-बच्चों को,
शोषण करते हैं निरीह लोगों का,
तार तार कर देते हैं किसी की अस्मिता को,
शर्मसार कर देते हैं मानवता को,
रक्त बहा देते हैं धर्म के नाम पर,
नहीं बख्शते मूक पशुओं को भी,
धिक्कार है उन लोगों को,
मर चुकी है उनकी आत्मा।
#सभ्य