फिर भी इंसान है हम !!
जनावरों जैसा बर्ताव कर्ते नहीं थकते ,
पर फिर भी इंसान है हम !
जनवरो से भी बत्तर है,
फिर भी इंसान है हम !
कुत्ते, बिल्ली जैसे लड़ते है ,
फिर भी इंसान है हम !
हर बात पर अड़जाते है,
ऐसे इंसान है हम ।
इंसान के भेस में कुत्ते घूम रहे थे ....
लेकिन कुत्तों को भी शरम आ जाए .... , ऐसे इंसान है हम !
इंसानियत तो भूल गए है, हैवानियत भी है बरक़रार,
इतनी सी है अरदास , बस छोड़दो ये संसार ।
Humanity के जँढे गाड़ते फिरते हो ....
जबकि इसका मतलब भी तुम जानते नहीं हो 😟🧐😒
तो भी इंसान है हम !!
इंसान को इंसान की कदर ना सही ....
लेकिन जनावर की भी ज़रूरत नहीं ?
ये पृथ्वी चल ही इनकी वजह से रही है....!!
फिर भी इंसान है हम ।
Poetry by • Jill शाह •