प्यार अब बदल गया है
प्रतिबध्धता के क़ैद से निकल गया है |
उल्फत का नामो निशान ना रहा
प्यार अब पहले सा मासूम ना रहा ||
वोह सचाई सादगी कहीं खो गई है
मक्कारी, फरेबी ओढ़े प्यार बदसूरत हो गयी है |||
अब तो शर्तो पे होती है मोहबत्तें,
वोह नहीं तो कोई और सही,
प्यार अब ईमानदारी के रास्ते से भटक गया है
बिकल्प के तलाश मैं मझधार मैं अटक गया है ||||
दौर बदला तो लोगों का किरदार बदल गया है
प्यार को देखने का नज़रिया बदल गया है |||||
बिस्वास, भरोसा खो गया है
प्यार अब हवस का मुखौटा ओढ़े
रूहानी से ज्यादा जिस्मानी हो गया है ||||||