#सरारती
सहर हो गई मेरी उनके सहर में
वो चांदनी रात महकाते रहे
मै ख्वाबों में तरासा उन्हें इस कदर
जैसे अंधेरों में जुगनू टिमटिमाते रहे
वो सरारती बन यूं सरारत किये
मै जलता रहा उनके चाह में
वो बत्ती जलाते - बुझाते रहे
मै तड़पता रहा पास आकर मिले
वो छत पर खड़े मुस्कुराते रहे
लाख कोशिश किया ख्वाब ही ख्वाब में
वो मन के मुताबिक आते जाते रहे
सराराती हैं इतना, की मोहब्बत ही अदा है
वो ख्वाबों में भी मोहब्बत निभाते रहे
।। ज्योति प्रकाश राय ।।