आगे है - भविष्य
असीम, अनछुआ
अनदेखा, अनजाना
लिए शंकाएं, आशाएं
भरे कुछ सपने
कुछ डर
पीछे है - अतीत
भोगा, व्यतीत
देखा, छुआ
सहा, रहा
जिया, किया
मध्य में - वर्तमान
एक समय धारा
चिरंतर प्रवाहमान
और
खाली शून्य लम्हों में
भरते हुए पहचान
और
इन सभी के भंवर में
फंसा ये मानव मन
पकड़े अतीत की परछाइयां
वर्तमान के कंधों पर लादे
भविष्य की अनगिन
आकांक्षाओं का भार सारा
:- भुवन पांडे
#आगे