#Onward life may be challenging
For COVID-19 battle fighting..!!!🙏🙏
My New Poem...!!!
अन-देखे सँतराज ने है तराशा मुझे
मिट्टी के गाड़ेंसे किया पयदा तुं मुझे
दिखता नही देखता है हर घड़ी तुं मुझे
प्रभुजी अल्लाह ईश्वर ईसु भगवान
अनगिनत नाम-औ-स्वरुप भी है तेरें
राजा-औ-रँक सब में दिखे तुं मुझे
सृष्टि रचयिता अजीब तेरी क़ुदरत
दाना एक ले कर देता अनेक तुँ मुझे
भूखा उठाता सुलाता भूखा नही तुं मुझे
नदी पर्वत बादल झाड़ पौधेँ फल फ़ुट
कया कया रच तु दिया है आशरा मुझे
जीदगींमें गिराके फिर सँभालता तुं मुझे
मेरी औक़ात है कया मेरा वज़ूद हे कया
रब चाहूँ कया तुजें जितना चाहता तुं मुझे
नव माह माँके पेट में भी देता गिजाँ तुं मुझे
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