क्या जरूरी है हर रिश्ते को नाम??
नाही मिलने के उम्मीद है,
नाही बात करने की आश,
साथ भी नहीं है तुम्हारा,
बस है तो एक प्यारा अहेसास और कुछ मीठी याद,
खोया तो शायद कुछ भी नहीं,
क्युकी शायद था ही नहीं मेरा,
पर पाया तो बहुत कुछ है,
कुछ यादें, कुछ लम्हें और साथ ही कुछ कर दिखाने का जस्बा,
कोई सायद कहेगा इसे प्यार ,
और कहेगा इसे दोस्ती ,
मुझे तो नहीं पता क्या नाम है इस रिश्ते का,
पर क्या जरूरी है हर रिश्ता को नाम??
- कृपाली