शुरुआत थोड़ी धीमी धीमी करना,
मुलाकात... रुहानी नी सी करना,
आज रात, बात प्यारी प्यारी सी करना,
इंतज़ार बहुत किया है, तकरार ज़रा भी ना करना
वैसे तो इश्क़ के रास्ते,हम अकेले ही मुसाफिर थे,
शाम सी ढली, सीने में आग सी जली,
मैं मयखाने चला,वो बोली, ज्यादा पिया मत करना,
मैं आपकी ही पियू हूं, अपने आपको, ऐसे उलझाया मत रखना
अगर तू, सुलझा देती, तो हम यूं, पी नहीं रहे होते,
मायूसी ओर बेदर्दी... यूं झेल नहीं रहे होते... ।
शुरुआत तो , तूने की थी, इतने प्यारे लगने की,
ना, भी चाहूं, तो भी, महोब्बत, साली हो ही जाती है ...
✍️ अलय
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दिनांक ०१ जून २०२०
#शुरुआत