जिंदगी का सफ़र कितना सुहाना होता हे जब मंज़िल का पता होता हे,
राहे भी अपने आप मील जाया करती हे जब मंज़िल का पता होता हे,
मौसम भी कितना रंगीन लग जाता हे जब मंज़िल का पता होता हे,
ना खोने का डर ना खो जाने का डर रहता जब मंज़िल का पता होता हे,
हर मोड़ पर अपना कोई मील हि जाता हे जब मंज़िल का पता होता हे,
सफर भी जल्दी हि कट जाता हे जब मंज़िल का पता होता हे,
हरे हरे पेड़ भी साथ चला करते हे जब मंज़िल का पता होता हे,
हवाएँ भी साथ रहती हे एसे वक़्त में जब मंज़िल का पता होता हे,
पर्वत भी जेसे साथ चल रहे हो एसे वक़्त में जब मंज़िल का पता होता हे,
हमसफ़र भी साथ निभाता चल रहा होता हे जब मंज़िल का पता होता हे,
जहन मे महसूस रहता हे एसी मंज़िलो का जब मंज़िल का पता होता हे,
जिंदगी का सफ़र कीतना सुहाना होता हे जब मंज़िल का पता होता हे।