तुम कहते थे तुम शक्ति हो मेरी
जीवन की तुम भक्ति हो मेरी
तुम कहते थे तुम आस हो मेरी
जो खत्म ना हो वो प्यास हो मेरी
तुमने ही कहा था साथ रहेंगे हम
मिले चाहे खुशी मिले चाहे गम
पलको पर यूँ बिठा कर अपने
कदमो में यूं गिराया क्यों
चार कदम यूँ साथ निभा कर
मेरा दामन छोड़ा क्यों
कभी मीरा कभी राधा बनकर
प्रेम ही दी हर रूप में ढलकर
क्यों हर कदम पर केवल उपेक्षा
मेरी और कितनी अग्नि परीक्षा