गजल
काफिया .आ ।
रदीफ़ .न कीजिए ।
विषय .अफवाह ।
झुठी अफवाह फैलाया न कीजिए ।
दिल बड़ा नाजुक जुल्म ढ़ाया न कीजिए ।।
लोग धरों में बंद उन्हें सताया न कीजिए ।
कुछ शर्म की बात ,इसे बढाया न कीजिए ।।
सच्ची बात दिल से ,छुपाया न कीजिए ।
दिल की बात ,होठो पर लाया कीजिए ।।
प्रेम में आँख मिचौली ,खैला न कीजिए ।
प्यासी आँखों को ,फिर रुलाया न कीजिए ।।
निगाहें तुम्हें ढूँढती ,इन्हें बताया कीजिए ।
अपना बेशर्म चेहरा ,छुपाया न कीजिए ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।