"शक्तिमान"होने का दर्प,
चूर चूर होते देख लिया....
चंद सांसों की खातिर,
उस "सर्व शक्तिमान" के आगे,
सर झुकातें देख लिया.....
फरियाद़ में उठें हाथों ने,
बोझ उठाना सीख लिया,
जो लेने आतुर रहते थे सदा,
उन हाथों ने बांटना, सीख लिया.....
किस्मत की लकीरों को,
कंधे पर ढोंते,
मुस्कुराना सीख लिया,
आड़ी तिरछी जीवन पगडंडी पर,
कदम उठाना, सीख लिया...
वक्त का तराज़ू,
तकाज़ा करने लगा है,
हंसता है हालातों पर,
इस बदले वक्त से,
जीवन जीने का अंदाज, सीख लिया...
रूठे रहते थे,
किस्मत से यूं ही,
अब सौ सौ बार,
किस्मत को सरहाना, सीख लिया.....
आस पास हर कहीं,
मौत की आहट सुन,
अब जिंदगी के लिए,
तरसना,सीख लिया....
"सर्व शक्तिमान" समझने की,
भूल ने, जिंदगी को,
पल पल मौत के,
नज़दीक कर दिया...
हां, जिंदगी जीना सीख लिया...!!!!!
📝📝नेहा चौधरी की कलम से✍️✍️