एक बार तो कर स्वीकार , ये दुनिया लगती भली है
ये तो मिसरी की डली है
नाज़ुक फूलों की कली है
मेरे शिकवे और शिकायत, है झूठी चाल चली है
छुपाई अपनी कमी है
मेरी आंखों में नमी है
है झूंठा मैंने बताया जिसे, मेरी कमजोर कड़ी है
गिरा हूं खुद की नज़र में
अकेला हूं अपने शहर में
अपनी परीक्षा में , परीक्षक खुद सब होते
हैं सब परिणाम छुपाते
सच्चाई नहीं बताते
जो भी हम निर्णय लेते, मन है आईना दिखाता
मगर हम देख न पाते
सदा उसको झुठलाते
हमारा होता जो अस्तित्व, है दुनिया वही दिखाती
रहते हैं हम पछताते
जग है झूठा ये बताते
जन - जन के अंदर है ईश्वर, अपना देखे हर काम
खुद को हैं हम भरमाते
है दुनिया बुरी बताते
#खुद