मेरी कविता
यहां किसी का प्यार नहीं बस थोड़ी सी सच्चाई मिल जाये,
कोई दिखावटी मुस्कान नहीं बस वो अपनों का प्यार मिल जाये...!!
सुबह-सुबह वो व्हाट्सएप फेसबुक पर नहीं पर वो खुद आ जाये ,
लाखों दोस्त नहीं कोई समझ सके मुझको बस ऐसा मिल जाये...!!
घर से निकलु बाहर तो नुक्कड़ पर बचपन के दोस्त मिल जाये ,
ना कोई ख्वाहिश ना कोई आरजू हे मेरी बस थोड़ी सी सच्चाई मिल जाये...!!
यह जो भागती हुई गलियां है वहां शांत दरिया सा बन जाये,
कोई तारीफों की सौगात नहीं बस कोई अपना सा मिल जाये...!
Monani mansi