कभी कभी कुछ अनबन बन जाती है खुदा से,
तो तुम्हे याद कर कभी सिहर सा जाता हूं में।
कभी चलते बैठे अकेलेपन से जूझ ता रहता हूं,
और तुम्हारा साया नज़र आते ही डर सा जाता हूं।
ना कभी पानी की उम्मीद की हमने जीते जी,
ना कभी खोने का डर जागा साथ होने से।
फिर भी कभी पाने आप को कहीं भूल गया हूं,
ऐसा मंजर सा लगता है तो खुद की चाहत से मुकर जाता हूं में।
❣PYAR KA AK AHESHASH ❣