सब कहते हैं तुम मेरे भाग्य में नहीं थे,
क्रूर काल ने छीन लिया तुम्हें मुझसे,
पर नामुमकिन है तुम्हें भूल पाना,
तुम्हारे स्नेहिल स्पर्श मेरी रगों में हैं,
तुम्हारे प्रेम की खुशबू चारों ओर बिखरी है,
जहां दृष्टि ठहरती है वहाँ तुम हो,
बन्द पलकों में तुम्हारी तमाम यादें हैं,
वो रूठना-मनाना,लड़ना-झगड़ना,
चाय की प्याली के साथ सुबह जगाना,
पहला निवाला मुझे खिलाना,
तुम्हारे न्यूज चैनल को मेरा बदलना,
होली के रंग,दिवाली के दीपक,
हर जगह तुम्हारी मौजूदगी का अहसास,
तुम तो चल दिए निर्मोही बनकर,
पर मैं नहीं बिसरा सकती हमारी प्रीति।
#भाग्य