#light
#प्रकाश
स्वागत कर आज रोशनी का, मानवता का दीप जला
मिट गया अंधेरा रात कटी, सूर्योदय में जैसे सीप खिला
लेकर कुदार मजदूर चला, पर्वत को तोड़ राह करने
हल कांधे रख कृषक चला, बंजर में हरित चाह भरने
रक्षक सीमा पर डटे हुए, दिन - रात शत्रु निगरानी में
आलस का मिटा अंधकार, प्रकाश भरे राजधानी में
तत्पर है जैसे लहर नदी की, नहीं छोड़ती कर्म अपना
आराम चैन को त्यागो तुम, संघर्ष परिश्रम धर्म अपना
नन्ही चींटी जैसे चलती, थकती,रुकती कभी नहीं
तुम भी उठो चलो पथ पर, विश्वास डिगाना कभी नहीं
दया, क्षमा का भाव भरो, अंधकार मिटाओ जन जन का
लक्ष्य कदम तल चूमेंगे, ज्योति जलाओ अंतर मन का
।। ज्योति प्रकाश राय ।।