तुम्हें क्या मिला,,
सितारों से सपने दिखाकर,
उन सपनों में हकीकत के रंग बिखराकर,
गए बीच सफ़र में मुझे छोड़कर,
तुम्हें क्या मिला।
जिंदगी यूं वीरान हो जाएगी,
हमें टूटा हुआ देखकर हैरान हो जाएगी,
कशमकश में यूं मुंह मोड़कर गए हमसे,
तुम्हें क्या मिला।
अब तेरी हर निशानी किसी कोने में पड़ी है,
आंखों में बस हमारे सावन की झड़ी है,
हमें खुद से ही बेगाना के गए,
तुम्हें क्या मिला।