इन विपरीत परिस्थितियों में
रखना है कुछ,तो हौसला रखो
ताबूत में बंद कर ज़हन के डर को
ना झुकने दो इसे, ना ही ख़ुद झुको
आ जाने दो कितने सैलाब आएंगे
तेरे हौसले के सामने ना टिक पाएंगे
करले मजबूत अपने इरादों की दीवार
चाह कर भी तुझको ना डिगा पाएंगे
लहरें ये वक़्त की तो बदलती रहेंगी
कभी तुझे भला तो कभी बुरा कहेंगी
रास्ते और वास्ते को गर तू समझेगा
तो तेरे ही इशारों पे ये हरदम बहेंगी
बस यही है वो नायाब नगीना
जिसे तू दे भी सकता है
जिसे तू रख भी सकता है
रखना है कुछ, तो हौसला रखो
#रखना