#पतंग
उड़ता फिरे जो आसमां में, जीवन का जो संदेश है।
वो पतंग कहता फिरे , धरती पर ही परिवेश है।।
जुड़ने से लेकर उड़ने तक की, उदाहरण वह धर रहा
अस्तित्व अपनों से जुड़ा है, निराकरण वह कर रहा
डोर जब अपनों से टूटा, खो गए किस बाग में
लोग मारे ठोकरें, खुद जलते रहे किस आग में
कहता पतंग साथ रखना, हाथों में अपना हाथ रखना
ज्योति जब तक प्रकाशित है, प्रेम सबसे नाथ रखना ।। ज्योति प्रकाश राय ।।