कभी यँहा कभी वँहा, जिंदगी है धुँवा-धुँवा
जाने पवन के झोके ले जायेंगे कँहा-कँहा
जीना सीख रहा हु ,बाद तेरे जाने के
बहाने ढूंढ रहा हु इस दिलको लुभाने के
फिर भी कसक जगाये,तेरी यादों कारवाँ
जाने पवन के झोके ले जायेंगे कँहा-कँहा
तू लैला ना बन सकी,में मजनूं तो बन गया
चलो शुकर है ,कोई तो महोब्बत में जीया
तू हारी ना मै जीता ,महोब्बत का ये जुवा
जाने पवन के झोके ले जायेंगे कँहा-कँहा
मिलते रहे इससे , मिलते रहे उससे
ना वक्त मिला कभी मिलनेका खुदसे
अब खुदके लिए जिऐंगे,जायेंगे जहाँ -जहाँ
जाने पवन के झोके ले जायेंगे कँहा-कँहा
कभी यँहा कभी वँहा, जिंदगी है धुँवा-धुँवा
Sagar...✍️
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