कभी घुटने टेक देता है धन के समक्ष,
कभी दबा दिया जाता है बाहुबली द्वारा,
कभी छिप जाता है झूठ के धुंध में,
कभी जकड़ जाता है कुटिल शब्द जाल में,
गरीब की पहुंच से सर्वदा सुदूर,
कभी सुबूतों के अभाव में मजबूर,
न्याय की देवी खड़ीं है कटघरे में,
आँखों में आंसू भरे,पट्टी बांधकर।
#न्याय